Sunday, February 23, 2025
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मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता: इन शब्दों का उपयोग करने से बचें

आज की तेज़-तर्रार ज़िंदगी में मानसिक बीमारियाँ एक आम समस्या बन चुकी हैं। डिप्रेशन, एंग्जायटी, बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को न केवल चिकित्सा की आवश्यकता होती है, बल्कि एक सहानुभूतिपूर्ण और सकारात्मक वातावरण की भी। कई बार अनजाने में कहे गए हमारे शब्द किसी मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति को गहराई तक चोट पहुँचा सकते हैं। आइए जानते हैं कि किन शब्दों या वाक्यों का इस्तेमाल हमें नहीं करना चाहिए।


1. “तुम्हें बस थोड़ा पॉज़िटिव सोचना चाहिए”

मानसिक बीमारी केवल नकारात्मक सोच का परिणाम नहीं होती। यह एक जटिल समस्या है, जिसमें न्यूरोलॉजिकल और अन्य कारक शामिल होते हैं। ऐसे में यह कहना व्यक्ति की समस्या को छोटा दिखाने जैसा है।


2. “यह सब तुम्हारे दिमाग का वहम है”

यह वाक्य व्यक्ति को और अधिक अलग-थलग महसूस करवा सकता है। मानसिक बीमारी वास्तविक होती है और इसे “वहम” कहना स्थिति को अनदेखा करने जैसा है।


3. “इतने कमजोर मत बनो”

यह वाक्य मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति के लिए अपमानजनक हो सकता है। मानसिक बीमारियों का साहस या कमजोरी से कोई संबंध नहीं होता।


4. “दूसरे लोग तो इससे भी बुरी स्थिति में हैं”

यह तुलना व्यक्ति की भावनाओं को नजरअंदाज करती है। हर किसी की परिस्थितियाँ और संघर्ष अलग होते हैं, और उन्हें कमतर आँकना गलत है।


5. “तुम्हें डॉक्टर के पास जाने की क्या ज़रूरत?”

मानसिक स्वास्थ्य के लिए चिकित्सा और परामर्श उतने ही ज़रूरी हैं जितने शारीरिक स्वास्थ्य के लिए। इसे हल्के में लेना या डॉक्टर की सलाह को अनदेखा करना व्यक्ति को मदद लेने से रोक सकता है।


6. “तुम हमेशा ऐसा ही करते हो”

किसी व्यक्ति की आदतों या व्यवहार पर निशाना साधना उनकी आत्मविश्वास को और कम कर सकता है। इससे वे अपने बारे में और भी बुरा महसूस करने लगते हैं।


क्या कहें?

यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति की मदद करना चाहते हैं, जो मानसिक रूप से परेशान है, तो सहानुभूति और समझदारी से पेश आएँ। कुछ सहायक बातें कहने के उदाहरण:

  • “मैं यहाँ हूँ, जब भी तुम्हें मेरी ज़रूरत हो।”
  • “मैं तुम्हारी स्थिति समझने की कोशिश कर रहा हूँ।”
  • “क्या मैं तुम्हारे लिए कुछ कर सकता हूँ?”

निष्कर्ष

मानसिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों को नकारात्मक शब्दों की बजाय सहारे और प्रोत्साहन की ज़रूरत होती है। हमारे शब्द उनके लिए दवा का काम कर सकते हैं या उन्हें और तकलीफ दे सकते हैं। इसलिए, हमें संवेदनशील और विचारशील बनने की आवश्यकता है।

याद रखें:

“शब्दों की ताकत होती है। उनका उपयोग सोच-समझकर करें।”

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